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शकुनि

विकिपिडिया नं
नेपाललिपि परिक्षण: 𑐠𑑂𑐰 𑐥𑑁𑐫𑐵 𑐣𑐾𑐥𑐵𑐮𑐮𑐶𑐥𑐶𑐂 𑐥𑐬𑐶𑐎𑑂𑐲𑐞 𑐥𑑁 𑐧𑑂𑐰𑐣𑐾𑐟: शकुनि 𑐟𑐶𑐫𑐵𑐡𑐶𑐳𑑄𑑋

शकुनि वेदकथं मनुयागु वंशजयाम्ह छम्ह हिन्दू पात्र खः।

शास्त्रय् दसु

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अनुक्रमणिका[१]

  • पक्षिन्,2/5/32/2/2,पुं/
  • शकुनि,2/5/32/2/3,पुं/
  • शकुन्त,2/5/32/2/4,पुं/

अष्टाङ्गहृदयम् — उत्तरस्थानम्[२] स्कन्दो विशाखो मेषाख्यः श्व-ग्रहः पितृ-संज्ञितः ।
शकुनिः पूतना शीत-पूतना-दृष्टि-पूतना ॥ २ ॥
३.२av स्कन्दो विशाखो मेषास्यः

अष्टाध्यायी-गणपाठः[३] आकर्षादिभ्यःकन् ५.२.६४ आकर्ष। त्सरु। पिशाच। पिचण्ड। अशनि। अश्मन्। विचय। चय। जय। आचय। अय। नय। निपाद। गद्गद। दीप। ह्रद। ह्राद। ह्लाद। शकुनि। आकर्षादिः। 162. इष्टादिः इष्टादिभ्यश्च ५.२.८८

अष्टाध्यायी हिन्दी व्याख्या सहितम् — षष्टः अध्यायः[४] [६|१|१४१] हिंसायां प्रतेश्च - उप और प्रति के बाद हिंसा अर्थ में वर्तमान कॄ धातु के ककार के पूर्व सुट् आता है। | लट् लकार के प्रथमपुरुष-एकवचन में हिंसा अर्थ में वर्तमान कॄ धातु का उप पूर्वक पूर्ववत उपस्किरति रूप बनता है। इसी प्रकार प्रति पूर्वक प्रतिस्किरति रूप बनेगा। [६|१|१४२] अपाच्चतुष्पाच्छ्कुनिष्वालेखने - चतुष्पात् जीव तथा शकुनि के द्वारा किए जाने वाला आलेखन के अभिद्येय होने पर अप उपसर्ग से पर्वर्त्ती `किरऄ धातु के ककार से पूर्व सुट् का आगम्। | अपस्किरते वृषभो हृष्टः, अपस्किरते कुक्कुटो भक्ष्यार्थी, अपस्किरते श्वा आश्रयार्थी। [६|१|१४३] कुस्तुम्बुरुणिजातिः| - जाति के वाच्य होने पर `कुस्तुम्बुरुणि ` शब्द से (कु + तुम्बरुणि) सुँट् का निपातन।

लिधंसा

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  1. ↑ विकिस्रोतः – अनुक्रमणिका
  2. ↑ विकिस्रोतः – अष्टाङ्गहृदयम्/उत्तरस्थानम्
  3. ↑ विकिस्रोतः – अष्टाध्यायी-गणपाठः
  4. ↑ विकिस्रोतः – अष्टाध्यायी हिन्दी व्याख्या सहितम्/षष्टः अध्यायः